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लडडू, पेड़ा, बर्फी और कालाकंद आदि तो आप ने खूब खाई होगी लेकिन क्या आप ने खीर मोहन मिठाई खाई है। मुझे तो लगता है कि आप पहली बार इस मिठाई का नाम सुन रहे होंगे। जी हां तराई बेल्ट की फेमस स्वीट की पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरागांधी भी बहुत शौकीन थी और चाव से खाती थी।
यह मिठाई खास उनके लिए विशेष तरीके से पैक होकर तराई बेल्ट के धौरहारा क्षेत्र से जाती थी। धौरहारा लखीमपुर खीरी की एक तहसील है और खीर मोहन यहीं की ईजाद है। खीर मोहन क्या है कैसा दिखता है यह बता पाना बहुत मुश्क्लि् है लेकिन समझने के तौर पर बस इतना समझा जा सकता है कि गुलाब—जामुन और छेने से मिलती जुलती इसकी रंगत होती है लेकिन स्वाद की अगर बात की जाए तो बिना खाए कोई भी व्यक्ति इसके स्वाद को डिस्क्रइाब नहीं कर सकता।
धौरहारा के लोगों के मुताबिक इंदिरा गांधी इस मिठाई को बड़े चाव से खाती थी और यह मिठाई धौरहार वासियों की ओर से चहीती प्रधानमंत्री के लिए अक्सार भेजी जाती थी। लोगों का कहना है कि इस मिठाई को जिसने भी खाया वह दीवाना हो गया। लेकिन खीर मोहन की बदकिस्मती यह है कि हजारों खासियते होने के बाद भी इसको ज्यादा लोग नहीं जानते।
इसका सबसे बाड़ा कारण है कि इसको बनाने वाले कारीगर की संख्या न के बाराबर है और जो लोग इसे बनाना जानते हैं वह इसको बनाने का तरीक नेक्सट जनरेशन को नहीं बतना चाहते। स्वाद का राजा खीर मोहन कहीं विलुप्त न हो जाए इस बात के अंदेशे को भी नहीं खत्म किया जा सकता।
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