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मां की महिमा बड़ी निराली है। भक्तों का हमेशा बेड़ा पार करती हैं। जो भक्त सच्चे दिल से मां की फरियाद करता हैं उसकी पुकार मां अवश्य सुनती है। आज हम मां के उन पांच दरबारों के बारे में बताने जा रहे हैं। जहां फरियाद के लिए भक्तों की लंबी कतार लगी रहती है।
शारदा मैया मंदिर :-इसे मैहर मंदिर भी कहते हैं । यह मंदिर मैहर की पहाड़ी पर स्थापित है।शारदा प्राचीन मंदिर है जिसे आलाऔर उदल की ईष्ट देवी कहा जाता है।यह मंदिर बहुत ही जागृत और चमत्कारिक माना जाता है। कहते हैं कि अभी भी रात को आल्हा और उदल आकर माता की आरती करते हैं। जिसकी आवाज नीचे तक गूंजती है जो सत्य का प्रमाण है।
दक्षायणी मंदिर - यह मंदिर तिब्बत स्थित कैलाश मानसरोवर के मानसा के निकट एक पर्वत पर है।यहां पर माता का दायां हाथ गिरा था यहीं पर माता साक्षात विराजमान है। यह माता दक्षायणी का मुख्य स्थान है। और इसे दक्षिणी मंदिर कहा जाता है।।
कालका माता कोलकाता में स्थित है। भारत राज्य के बंगाल के कोलकाता शहर में हावड़ा स्टेशन के पास 5 मील दूर भागीरथी के स्रोत पर कालीघाट नामक स्थान पर कालका मंदिर स्थापित है। कालका मंदिर जागृत शक्तिपीठ है रामकृष्ण परमहंस यहीं पर माता की आराधना एवं साधना करते थे इसलिए यह जागृत शक्तिपीठ है। भक्तों की सारी मनोकामनाएं यहां आ कर स्वता पूर्ण होती हैं।
पार्वती मंदिर बिहार के झारखंड राज्य में यह मंदिर बाबा बैधनाथ मंदिर के बगल में स्थापित है।यह शक्ति पीठ है।यहां पर भक्तों की अन्नय मनोकामनाएं पूर्ण होती है।
महामाया मंदिर:-यह मंदिर छत्तीसगढ़ के अंबिकापुर में स्थित है।यह शक्ति पीठ है। माता कुदरगढ़ीदेवि यह मंदिर पहाड़ी पर स्थित है।यह शक्ति पीठ है। इसके अलावा माता दुर्गा के देश और विदेशों में अनेक भव्य मंदिर है।जो भक्तों के मनोकामनाएं को पूरी करती है।
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