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दुर्गा पूजा या नवरात्रि हिंदुओं के द्वारा मनाया जाने वाला बहुत ही महत्वपूर्ण त्योहार है। हिंदू कैलेंडर के अनुसार, वर्ष में चार नवरात्रि होती है।दो मुख्य नवरात्रि और दो गुप्त नवरात्रि होती है।
पुराण में 108 शक्ति पीठ ,कालिका पुराण में 26 शक्ति पीठ, शिवचरित्र में 51 शक्ति पीठ, दुर्गा सप्तशती और तंत्रचूड़ामणि तालिका में शक्ति पीठों की हिंदू धर्म में शक्ति पीठों का विशिष्ट स्थान है। हिन्दू धर्म के अनुसार देवी भागवत संख्या 52 बताई गई है। साधारत: 51 शक्ति पीठ माने जाते हैं।
मां वैष्णोदेवी-मंदिर:- मां वैष्णो देवी मंदिर भारतीय विरासत का अभिन्न अंग है।भारतीय राज्य जम्मू और कश्मीर के जम्मू के पास कटरा से माता वैष्णोदेवी के दर्शनार्थ यात्रा भक्तों के साथ शुरू होती है। कटरा जम्मू से 50 किलोमीटर दूर है। कटरा से पहाड़ी लगभग 14 किलोमीटर की पर्वतीय श्रृंखला की सबसे ऊंची चोटी पर विराजमान है।
मां वैष्णोमंदिर में देशभर से लाखों भक्त दर्शन के लिए आते हैं।पर्वतीय श्रृंखला की सबसे ऊंची चोटी यहां विराजमान है।मनोकामना पूर्ति वर पातें हैं।मनसा देवी -भारत के हर कोने हर क्षेत्रों में देवी मंदिर है। भारतीय राज्य उत्तरप्रदेश के हरिद्वार शहर में शक्ति त्रिकोण है। इसके एक कोने पर नील पर्वत पर स्थित भगवती देवी चंडी का प्रसिद्ध स्थान है। दूसरे पर दक्षेश्वर स्थान वाली पार्वती। ये जगह अत्यंत महत्वपूर्ण है।
कहते हैं कि यहीं पर सती योग अग्नि में भस्म हुई थीं और तीसरे पर बिल्वपर्वतवासिनी मनसा देवी विराजमान हैं। मनसा देवी भक्तों की हर मनोकामना पूर्ण करने का वर देती है।मनसा देवी को दुर्गा माता का ही रूप माना जाता है। शिकवालि पहाड़ पर स्थित इस मंदिर पर देश-विदेश से हजारों भक्त आकर पूजा-अर्चना करते हैं। यह मंदिर बहुत जागृत है। मंदिर की आराधना करने से सारी मनसा पूर्ण होती है।
पावागढ़-काली माता :- वर्षो से भारत को अनेकता में एकता का भव्य देश कहा जाता है। विभिन्न क्षेत्रों में अलग-अलग प्रकार के लोगों का जीवन एक है। गुजरात की प्राचीन राजधानी चंपारण के पास वडोदरा शहर से लगभग 50 किलोमीटर दूर पावागढ़ की पहाड़ी की चोटी पर स्थित है । मां काली का मंदिर। काली माता का यह प्रसिद्ध मंदिर मां के शक्तिपीठों में से एक है। माना जाता है कि पावागढ़ में मां के दरबार में भक्तों की सभी पवित्र मनोकामनाएं पूरी होती हैं। नयना देवी :-नैना देवी मंदिर कुमाऊं क्षेत्र के नैनीताल की सुरम्य घाटियों में ऊचें पर्वत पर बड़ी सी झील त्रिऋषिसरोवर मल्लीताल पर स्थित है।मंदिर भव्य है।प्राचीन मंदिर पहाड़ों के फूटने से दब गया। उसके पास ही यह नैना देवि मंदिर स्थित है।
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