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अक्सर लोग कहते हैं कि जो प्राप्त है वही पर्याप्त है परन्तु यह बात सत्य नही है क्योंकि यदि हम मिली हुई वस्तु को पर्याप्त समझ कर हाथ पर हाथ रख कर बैठ जाएँगे तो अकर्मण्यता आ जाएगी इससे हमारी कार्यकुशलता कम हो जाएगी |
हमें सदैव आगे बढ़कर अपने लक्ष्य को प्राप्त करना चाहिए इसके लिए कुछ मूलभूत बातों पर अमल करना चाहिए। सदैव कर्मठ रहें नया अनुसंधान करते रहें | पुरानी कमियों से कुछ सीखें |
बड़ों के साथ कुछ समय अवश्य बिताएँ, अकेले मे कोईसृजनात्मक कार्य करें , अपनी उपलब्धियों से कभी संतुष्ट न हों, बाधाओं को ठोकर मारकर आगे बढ़ें, विश्वास का दामन कभी न छोड़ें .
यदि कोई व्यक्ति जीवन में सतत् प्रत्नशील रहेगा तो उसे मंज़िल अवश्य प्राप्त होगी | जीवन मेंनसंतुष्ट वही होते है जिनकी आगे कुछ करने की इच्छा समाप्त हो जाती है
हमें सदैव अर्जित वस्तुओं को बढ़ाना चाहिए फिर चाहे वह ज्ञान हो या धन , हमें यूँ हाथ पर हाथ रखकर नहीं बैठना चाहिए |
अगर हमारे महापुरुष भी आलस्य में बैठे रहते तो देश स्वतंत्र न हो पाता हम गुलामी का जीवन जी रहे होते | मंज़िल तक पहुँचने के लिए संघर्ष अति आवश़्यक है और संघर्ष सदैव वीरों ने ही किया है |
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