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भोजन करने के सही समय को लेकर अच्छी ख़ासी बहस चलती ही रहती हैं। लेकिन इसमें हमेशा से लोगों के मतों में काफी अंतर देखने को मिलता रहा है। लेकिन बहस से शामिल अलग-अलग हिस्सों के लोगों में किसकी बात सही है और किसकी ग़लत इसका आँकलन कर पाना बहुत ही मुश्किल हुआ करता है। ऐसे में इस झंझट से पार पाने के लिए और से अच्छी तरह से समझने के लिए आपको ऋषि वागभट्ट की ओर देखना पड़ेगा। जी हाँ, हमारे देश मे 3000 साल पहले एक ऋषि हुए जिनका नाम था वागभट्ट। उन्होंने अपनी पुस्तक ‘अष्टांग हृदय’ में स्वस्थ्य रहने के 7000 सूत्र लिखे हैं। इसलिए भारतवर्ष में 3000 साल पहले से भोजन की इसी परंपरा का निर्वहन होता आ रहा है। ऐसे में आइए आज जानते हैं कि वाग भट्ट के अनुसार अपने शहर के हिसाब से जाने भोजन करने का सही वक़्त क्या है।
वागभट्ट अपने अनुसंधान के आधार पर कहते हैं कि सूर्योदय होने से लगभग ढाई घंटे बाद तक जठराग्नि सर्वाधिक तीव्र होती है। मान लो अगर आप चेन्नई में हो तो 7 बजे से 9 बजे तक जठराग्नि सबसे ज्यादा तीव्र होगी। इसी सूत्र पर अरूणांचल प्रदेश में चार बजे से साढ़े छह तक का समय उत्तम है। यही बात अगर मे गुजरात मे जाकर कहूंगा तो समय बदल जाएगा। सूर्य का उदय जैसे ही हुआ उसके अगले ढाई घंटे तक जठराग्नी सबसे ज्यादा तीव्र होती है। ऐसे में प्रत्येक स्थान पर सूर्योदय से ही भोजन करने का समय निर्धारित होता है।
वागभट्ट ने एक और आयुर्वेद के अनुसार इस बात पर भी अध्ययन किय कि कब और कितना भोजन खाना चाहिए। उनके अनुसार कहते है कि सुबह का खाना सबसे ज्यादा। अगर आप दोपहर का भोजन आप कर रहे हैं तो वो थोड़ा कम करिए। उसे नाश्ते से एक तिहाई कम कर दीजिए और रात का भोजन दोपहर के भोजन का एक लिहाई कर दीजिए। मालूम हो कि यूरोप और अमरिका में नाश्ता कम करने का कारण सूर्योदय का देर से होना है। इस प्रकार भोजन करने का क्रम सूर्य की परिक्रमा के अनुसार ही तय किया जाना सर्वोत्तम होता है।
Author: Amit Rajpoot
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