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पूजा पाठ हमारे जीवन का एक बड़ा ही महत्वपूर्ण हिस्सा है। पूजा-पाठ से हमारे मन को शान्ति मिलती हैं और जीवन मे सकरात्मक ऊर्जा का संचलन होता हैं ,पर कैसे हम सही रूप में पूजा-पाठ करें और भगवान को प्रसन्न करें। सच्ची श्रद्धा और लगन से ही पूजा सफल होती हैं। लेकिन कई बार हमारे मन मे इसकी विधियों के सही-गलत को लेकर सवाल आता है। आईए तो आज हम आपको पूजा -पाठ की कुछ ऐसी ही विधियां बताते हैं।
पूजा करने से पहले दीपक जलाएं। दीप की रौशनी से सकारात्मक ऊर्जा आती है साथ ही धूप अगरबत्ती जलाएं। इससे वातावरण में मौजूद कीड़े मकोड़े और हानिकारक अवयवों का नाश होता है,इसके सुगंध से परिवेश में सौम्यता आती है।
किसी भी पूजा के प्रारंभ में अपने कुल देवता का स्मरण कर लें, तत्पश्चात पंचदेव की पूजा अवश्य करें ये शुभ होता है। जैसा कि आपको ज्ञात होगा पंचदेव यानी सूर्यदेव, श्रीगणेश,दुर्गा,शिव, विष्णु ये सभी देवी-देवताओं की पूजा कर घर में सुख-समृद्धि आती है।
पूजन सामग्री में जल, पुष्प,अक्षत,धूप दीप का होना आवश्यक है। पूष्प कोमलता की प्रतीक है,इसे इसलिए कोमल भाव से लोग देवी-देवताओं पर अर्पित करतें हैं। ज्योतिष के अनुसार भगवान शिव और केतकी को तुलसी नहीं चढ़ाना चाहिए,सूर्य की पूजा अगस्त फूल से नहीं करने चाहिए, गणेश की पूजा धूवा से करने चाहिए, तुलसी से नहीं।
नैवेद्य जरुर अर्पित करें। गंगा जल, तुलसी,बिल्वपत्र,कमल कभी बासी नहीं होता,इसे आप पूजा वाले दिन से पूर्व भी संचय कर रख सकते हैं। वायु पुराण के अनुसार पुष्प नहाने के बाद तोड़ना चाहिए, लेकिन अब लोग अपने सुविधा अनुसार पूष्प तोड़ते हैं।
पूजन हमेशा अनामिका अंगुली से करने चाहिए,इसी के माध्यम से आप पुजन सामाग्री भगवान पर अर्पित करें। पूजा में स्वास्तिक,कलश,नवग्रह और जिनकी पूजा करने हो उनकी मूर्ति रखें। परिक्रमा करने की नियमित:सभी भगवान की अलग-अलग है, भगवान सूर्य की7, गणेश की 3, विष्णु की 4,और शिव भगवान की 3बार करने चाहिए। पूजा कभी कबाड़ घर के आसपास ना करें।
हिन्दू मान्यता के अनुसार जितने देवी-देवतायें है उनकी पूजा की अलग-अलग विधान है। आप अपने अनुसार करें,जितने सक्षम है उसी अनुसार करें, वैसे कर्म की पूजा को सर्वोपरि माना गया है। पूजा में मंत्र जाप करने का विधान है,सभी देवी-देवताओं की अलग-अलग मंत्र है। अंतिम में हवन और आरती की परम्परा होती है, तत्पश्चात प्रसाद वितरण किया जाता है, कहीं कहीं इसके आडम्बर भी बहुत है। दान दक्षिणा का भी रिवाज है,साल में दुर्गा पूजा दीवाली,छठ, शिवरात्रि ये सभी पर्वों को लोग बहुत धूमधाम से मनातें है। जिससे मन को शांति मिलती है और जिंदगी सुख शांतिमय बितती है।
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