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हमारे भारत में अनेकों भगवानों ने अवतार लिए हैं, जिन्होने अपने जीवनकाल में धर्म और सत्य के संदेश दिए हैं। सभी जानते हैं कि मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम भगवान विष्णु जी के अवतार थे और उन्होने हमेशा सत्य और धर्म का संदेश दिया। श्रीराम जी के जीवन के बारे में तो सभी जानते हैं। रामायण में आपने सारी कथाएं पड़ी होंगी। आज हम आपको रामायण में मौजूद उन स्थानों के बारे में बताने जा रहे हैं जिनका महत्व रामायण में बहुत रहा है।
रामायण से जुड़े एहम स्थान-
केवट प्रसंग- बता दें रामायणनुसार राज-पाट त्यागकर वनवास को जाते समय श्रीराम, माता सीता और लक्ष्मण सर्वप्रथम अयोध्या से कुछ दूर स्थित मनसा नदी के समीप पहुंचे। इसके बाद गोमती नदीं पार कर वे इलाहाबाद के समीप वेश्रंगवेपुर गये जो राजा गुह का क्षेत्र था। जहां उनकी मुलाकात केवट से हुई जिसको उन्होंने गंगा पार करवाने को कहा था। वर्तमान में वेश्रंगवेपुर सिगरौरी के नाम से जाना जाता है जो कि इलाहाबाद के समीप स्थित है। चित्रकुट का घाट- यहा वह स्थान हैं जहां श्रीराम जी के अनुज भरत उन्हे मनाने और घर ले जाने आए थे ऐसा विद्वानों का मानना है।
अत्रि ऋषि का आश्रम- एक बार भ्रमण करते-करते भगवान श्रीराम सतना मध्यप्रदेश पहुंचे। वहां श्रीराम जी ने ऋषि के आश्रम में कुछ समय व्यतीत किया। अत्रि ऋषि, माता अनुसूइया एवं उनके भक्त सभी वन के राक्षसों से काफी भयभीत रहते थे। श्रीराम ने उनके भय को दूर करने के लिए सभी राक्षसों का वध कर दिया।
दंडकारणय- अत्रि ऋषि के आश्रम से आगे आकर भगवान श्रीराम जी ने दंडकारयण ‘छतीसगढ़‘ के वनों में अपनी कुटिया बनाई। यहां काफी घने जंगल हैं जहां भगवान राम की निशानियां पाई जाती हैं।
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