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कहां जाता है कि बच्चों की पहली शिक्षा उनके घर से ही होती है। आपको बता दें कि कम उम्र के बच्चों के बेहतर विकास के लिए जितने जिम्मेदार उनके माता-पिता होते है उतनी ही महत्वपूर्ण भूमिका उनके शिक्षकों की होती है।
पहले के समय में 2 से लेकर 5 साल तक के बच्चों को घरों में ही शिक्षा प्राप्त कराई जाती थी तो वहीं आजकल के समय में बच्चों को प्ले स्कूल्स में डाल दिया जाता है। इसका एक कारण ये भी है कि माता-पिता दोनों ही नौकरी करते हैं इसलिए उनके पास इतना समय नहीं होता है।
वही दूसरा कारण है कि आजकल ज्यादातर लोग परिवार से अलग रहते है। ऐसे में बच्चों को दादा-दादी और परिवार के अन्य सदस्यों से शिक्षा और संस्कार नहीं मिल पाते है। तो ऐसे में बच्चों को प्ले स्कूल में डाल दिया जाता हैं। आज हम आपको बताने जा रहे है कि आप कैसे अपने बच्चों पर ध्यान रखें।
माता-पिता की जिम्मेदारियां
कई बार ऐसा होता है कि माता-पिता अपने बच्चों को प्ले स्कूल भेजकर उनपर ध्यान देना छोड़ देते है।, तो आपको बता दें कि ऐसा करना बिलकुल गलत है माना बच्चें का पूरा ध्यान रखा जाता है प्ले स्कूल में लेकिन आप उनको छोड़ दें तो ये बात पूरी तरह से गलत है। आप उनका ध्यान रखें देखे आपका बच्चा क्या सिख रहा हैं।
शिक्षकों की भूमिका
माता-पिता साथ-साथ शिक्षकों की अहम भूमिका होती है बच्चों के विकास के लिए उनकी देख-रेख करने में। बच्चें एक मिट्टी का रूप होते है। जिस प्रकार मिट्टी के बर्तन को आकार दिया जाता है ठीक उसी तरह ही बच्चों को जो माहौल मिलता है वो उसी में बड़े होते है। बच्चों में सबसे ज्यादा असर माहौल का पड़ता है। स्कूल एक ऐसा पड़ाव है जहां पर बच्चों का मानसिक विकास शुरू होता है। ऐसे में शिक्षक भी माता-पिता से लगातार संपर्क में रहें।
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